Vesh Viragee No Mare Haiye Dharvo Chhe Lyrics in Hindi – Jain Bhajan

Vesh Viragee No Mare Haiye Dharvo Chhe Lyrics in Hindi – Jain Bhajan

“Vesh Viragee No Mare Haiye Dharvo Chhe” एक गहराई से भरा जैन भजन है, जो धर्म की अटूट भावना और भक्ति पर जोर देता है। इसके बोल हमें यह सिखाते हैं कि बाहरी रूप बदल सकता है, लेकिन आंतरिक धर्म और श्रद्धा स्थिर और अडिग रहनी चाहिए। यह भजन सुनने वालों को आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक दृढ़ता की ओर प्रेरित करता है, जिससे मन में स्थिरता और शांति का अनुभव होता है।

Vesh Viragee No Mare Haiye Dharvo Chhe Lyrics in Hindi

वेष विरागींनो, मारे हैये धरवो छे, 

जिन आज्ञा पाळीने, मारे भवजल तरवो छे, 

ओ गुरु मने आपो, पावन दीक्षा,

 आ बाळ तमारो, करे छे प्रतीक्षा…(१)

 

तारो मारो साथ अनंत छे, 

मारे बनवुं साचा संत छे, 

तारा चरणे मारो अंत छे, 

प्रभु शुं कहुं? तारी भारी ज साची प्रीत छे,

 मारूं जीवन प्रभु संग-गीत छे, 

मारा मनडानो तुं मीत छे, 

प्रभु शुं कहुं? वेष विरागीनो…(२)

 

मम मुंडावेह, मम पव्वावेह, मम वेसं समप्पेह…

 

डूबे जीवन जहाज रे,

 मारे सजवो संयम साज रे,

 पेहरी जिन आज्ञा ताज रे, 

गुरु शुं कहुं? जवा मुक्तिपुरी काज रे, 

झालो गुरु मारो हाथ रे, 

आतमनो एक अवाज रे, गुरु शुं कहुं? 

वेष विरागींनो…(३)

Author: Jain Sattva
Jain Sattva writes about Jain culture. Explore teachings, rituals, and philosophy for a deeper understanding of this ancient faith.

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